हाल ही में मैंने एक खबर पढ़ी जिसमें बताया गया कि अरावली पहाड़ियों के आसपास जंगल कटाई, खनन और अवैध निर्माण तेजी से बढ़ रहे हैं। यह खबर पढ़ते ही मेरा पहला reaction था —
क्या हम अपने ही पहाड़ों और प्रकृति को धीरे-धीरे खत्म कर रहे हैं?
अरावली सिर्फ एक पहाड़ नहीं है, यह उत्तरी भारत के मौसम, हवा की गुणवत्ता और पर्यावरण का बड़ा सहारा है। लेकिन इंसानी लालच की वजह से इन पहाड़ियों का संतुलन लगातार बिगड़ रहा है।
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🌿 अरावली क्यों महत्वपूर्ण है? — मेरा Positive Realization
जब मैं इस विषय को और गहराई से समझा, तो मुझे महसूस हुआ कि अरावली का महत्व कितना बड़ा है:
✔ यह रेगिस्तान को फैलने से रोकती है
✔ दिल्ली-NCR की हवा को संतुलित करती है
✔ हजारों पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं का घर है
✔ बारिश और भू-जल को सुरक्षित रखती है
हम प्रकृति से जो लेते हैं, उसका बदला कभी चुका नहीं सकते… इसलिए इसे बचाना हमारी जिम्मेदारी है।
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⚠ खतरे जो नजरअंदाज़ नहीं किए जा सकते
खबरों के अनुसार कुछ गंभीर समस्याएँ बढ़ रही हैं:
❗ अवैध खनन
❗ पेड़ों की कटाई
❗ पहाड़ियों की खुदाई
❗ बिना प्लानिंग के निर्माण
मुझे जो बात सबसे ज्यादा परेशान करती है वह है —
आज कमाई के लिए जो नुकसान हो रहा है, उसका असर आने वाली पीढ़ियां झेलेंगी।
मेरी नजर में समाधान सिर्फ कानून या सरकार नहीं है।
हम लोगों की सोच भी बदलनी चाहिए:
👉 प्रकृति को “resource” नहीं, “सुरक्षा ढाल” समझना होगा
👉 विकास जरूरी है, लेकिन संतुलन के साथ
👉 पेड़ लगाना सिर्फ फोटो के लिए नहीं — जिम्मेदारी के लिए होना चाहिए
मेरा reaction साफ है —
अगर अरावली बची रहेगी, तभी हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा।
🌄 जब मैंने अरावली देखी — एक भावनात्मक अनुभव
एक बार मुझे अरावली पहाड़ियों के पास जाने का मौका मिला।
शांत हवा, पहाड़ों की ढलान और हरी-भरी घाटियाँ देखकर लगा कि
प्रकृति हमें सिखाती है — धीमे चलो, लेकिन सही चलो।
उस पल मुझे महसूस हुआ कि ऐसी जगहें सिर्फ देखने के लिए नहीं,
संभालने के लिए भी दी गई हैं।
✔ Conclusion — सोचना आज जरूरी है
अरावली पहाड़ सिर्फ मिट्टी और पत्थरों का ढेर नहीं है।
यह हमारी
🌍 हवा
💧 पानी
🌿 प्रकृति
और 🌱 भविष्य से जुड़ा हुआ है।
अगर हमने अभी ध्यान नहीं दिया,
तो आने वाले सालों में हम प्रकृति से दूर नहीं…
प्रकृति हमसे दूर हो जाएगी।
💬 Readers से मेरा सवाल
आपको क्या लगता है —
विकास जरूरी है या पर्यावरण की सुरक्षा पहले?
👇 अपनी राय comments में जरूर लिखें — मैं पढ़ने का इंतज़ार करूँगा 🙂




