मुंबई के शिवाजी पार्क में Gyanesh Kumar के खिलाफ हुए बड़े विरोध प्रदर्शन ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर बहस को और तेज कर दिया है। हजारों प्रदर्शनकारियों ने उनके इस्तीफे की मांग की और SIR तथा voter list में बड़े पैमाने पर हुए बदलावों को लेकर सवाल उठाए।
लेकिन इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि लोग सड़क पर क्यों उतरे।
सबसे बड़ा सवाल है — आखिर इतने लोगों के voter list से नाम क्यों हटे?
Piyar Reacts
अगर किसी नागरिक का नाम voter list से हट जाता है और वह चुनाव में वोट नहीं डाल पाता, तो यह कोई छोटी बात नहीं है।
Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, SIR और voter-list से जुड़े कई फैसलों को लेकर दो Election Commissioners ने पिछले 10 महीनों में कम-से-कम 14 बार objections दर्ज किए थे। रिपोर्ट में voter registration, नाम जोड़ने-हटाने और Election Commission के digital systems से जुड़े सवाल भी उठाए गए।
यही वजह है कि आज जनता सवाल पूछ रही है।
अगर voter list में नाम हटाया गया है, तो किस आधार पर हटाया गया?
अगर किसी genuine voter का नाम गलती से हट गया, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
और सबसे जरूरी—
जिस नागरिक का वोट ही voter list से गायब हो गया, क्या उसकी आवाज को सिर्फ “आरोप” कहकर खत्म कर दिया जाएगा?
“Vote Chori” के आरोपों पर भी सवाल
मुंबई protest में “Vote Churaya Mera” जैसे slogans और posters भी दिखाई दिए। प्रदर्शनकारियों ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
यहां मेरा reaction साफ है।
अगर कोई कह रहा है कि वोट चोरी हुई, तो उस आरोप की पूरी जांच होनी चाहिए।
लेकिन अगर लाखों-करोड़ों voter records में बदलाव हुआ है, तो जनता को यह जानने का अधिकार भी है कि किसका नाम क्यों हटाया गया, किस आधार पर हटाया गया और कितने लोगों को दोबारा शामिल किया गया।
ECI ने खुद उन राज्यों में, जहां SIR पूरा हो चुका है, eligible लेकिन छूटे हुए voters को दोबारा शामिल करने के लिए BLOs को verification और Form 6 के जरिए प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है।
तो सवाल और भी बड़ा हो जाता है—
अगर नाम गलत तरीके से हटने की संभावना नहीं थी, तो दोबारा verification की जरूरत क्यों पड़ी?
Gyanesh Kumar पर जनता का सवाल
आज Mumbai से लेकर Delhi तक Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग उठ रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि Election Commission की credibility और voter के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल पैदा हो चुके हैं।
दूसरी तरफ Election Commission और सरकार किसी भी गलत काम से इनकार करते हैं और अपनी प्रक्रियाओं को कानूनी बताते हैं।
इसलिए अब सबसे जरूरी चीज है—
सिर्फ बयान नहीं, पूरा रिकॉर्ड जनता के सामने आना चाहिए।
किसके नाम हटे?
क्यों हटे?
कितने नाम वापस जोड़े गए?
किन अधिकारियों ने फैसले लिए?
और जिन Election Commissioners ने objections उठाए, उनके सवालों का अंतिम जवाब क्या दिया गया?
इन सवालों का जवाब जितना साफ होगा, जनता का भरोसा उतना ही मजबूत होगा।
क्या Gyanesh Kumar को इस्तीफा देना चाहिए?
Mumbai protest में जनता और प्रदर्शनकारियों की मांग साफ दिखाई दे रही है—Gyanesh Kumar इस्तीफा दें।
अब सवाल यह है कि सरकार और संवैधानिक व्यवस्था इस बढ़ते विरोध को कैसे देखती है।
क्या Gyanesh Kumar के खिलाफ उठे सवालों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी?
या सरकार और Election Commission उनके साथ मजबूती से खड़े रहेंगे?
और सबसे बड़ा सवाल—
अगर जनता के सामने voter list में नाम हटने के documented मामले और Election Commission के अंदर से उठे सवाल मौजूद हैं, तो क्या Gyanesh Kumar को अपने पद पर बने रहना चाहिए?
Piyar Reacts का सवाल आपसे:
क्या Gyanesh Kumar को इस्तीफा देना चाहिए?
क्या सरकार को पूरे SIR और voter-list विवाद की स्वतंत्र जांच करानी चाहिए?
और अगर किसी voter का नाम गलत तरीके से हटाया गया है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होनी चाहिए?
अपनी राय Comment में जरूर बताइए।
— Piyar Reacts
